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Gastric Disorders Workshop

GUT & MIND


“अंगों में लगातार तनाव बने रहना ही गैस्ट्रिक रोग है”


   गैस की समस्या सिर्फ़ वायु रोग नहीं होकर यह पाचन और निष्कासन के संबंध में होने वाली समस्या का संकेत है । और मेरे अनुभव में यह सिर्फ पाचन और निष्कासन से संबंधित ही नहीं बल्कि इसका मूल संबंध कहीं ना कहीं मन से व अन्तर्मन से है । सिर्फ़ भोजन दोष ही नहीं बल्कि ऐसा देखा गया है कि जो भोजन इत्यादि में सही भी हैं उसने भी तो यह समस्या तो है , इससे सिद्ध होता है कि समस्या कि जड़ कहीं न कहीं अंतर्मन ही है । 

मैं दो प्रकार के लोगों में इस गैस्ट्रिक रोग को सबसे अधिक देखता हूँ :


उद्देश्यविहीन वात प्रधान व्यक्ति।

उद्देश्यपूर्ण वात प्रधान व्यक्ति।


उद्देश्य विहीन स्वभाव के व्यक्तियों में तो मन की दशा इतनी ख़राब और विचलित होती है कि उसके दिनचर्या ही असंतुलित हो जाती है जिसके कारण उसके पाचन और निष्कासन तंत्र ख़राब हो जाता है , जिससे गैस्ट्रिक रोग पनपता है इस प्रकार के रोगियों को बहुत अल्प काल में ठीक किया जा सकता है , किंतु अल्प विकसित मन के कारण इनमें अनुशासित होने की संभावना बहुत कम रहती है । इसी कारण इनका गैस्ट्रिक रोग खत्म होने का नाम नहीं लेता है । ऐसे लोगों में थोड़ा अनुशासन भी रोग का सम्पन्न कर सकता है जो योग देता है । 

दूसरे प्रकार के गैस्ट्रिक व वायु रोगी वे होते हैं जो जो उद्देश्य पूर्ण तो हैं किंतु उस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए इतनी जल्दीबाजी में रहते है , उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मन इंदिर्यों और देह की मांसपेशियों में इतना खिंचाव पैदा कर करते हैं कि उसे यह ज्ञात ही नहीं होता कि वह खिंचाव भी दे रहा है । । यह वायु रोग व गैस्ट्रिक रोग खतरनाक होता है जो पाचन और निष्कासन तंत्र को बहुत दोषपूर्ण और रोगी बना देता है । इस [रकार के लोगों में चाहे जितना अनुशासन हो फिर भी गैस्ट्रिक रोग नियंत्रण में नहीं आ पाता है , उसका मूल कारण अंतर्मन के द्वारा इन्द्रियों पर दिया गया तनाव होता है । 

ध्यान दें उद्देश्यविहीनता के कारण जो गैस्ट्रिक पैदा होती  वह बहुत गंभीर रोग नहीं देने पाती है , वह इसलिए कि मन की एकाग्रता की लम्बाई इतनी कम होती है कि वह पाचन तंत्र पर बहुत अधिक तनाव नहीं देने पाता है , किंतु उद्देश्यपूर्ण लोगों में तनावपूर्ण मानसिक एकाग्रता इतनी अधिक होती है कि दैहिक अंगों पर बहुत अधिक चोट पहुँचती है जिससे गैस्ट्रिक रोग ही नहीं बल्कि पूरे पेट में लगातार तनाव बने रहने का स्वभाव बन जाता है । 


इसी लिए मैं कहता हूँ कि “पाचन और निष्कासन जैसे अंगों में लगातार तनाव बने रहना ही गैस्ट्रिक रोग है”


यह वर्कशॉप किनके लिए है?

1-बार-बार गैस बनने की समस्या (Chronic Gas)

2-एसिडिटी एवं सीने में जलन (Acidity)

3-पेट फूलना एवं भारीपन (Bloating)

4-पुरानी कब्ज़ (Chronic Constipation)

5-इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS)

6-अपच एवं भोजन के बाद होने वाली असुविधा (Functional Dyspepsia)

7-तनाव से जुड़ी पाचन संबंधी समस्याएँ (Stress-related Gastric Disorders)

8-चिंता (Anxiety) के साथ होने वाली पाचन समस्याएँ


आप इस वर्कशॉप में क्या क्या सीखेंगे?

✅ गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग का वास्तविक कारण
✅ Gut–Brain Axis का विज्ञान और योगिक दृष्टिकोण
✅ क्या चिंता (Anxiety) गैस बना सकती है?
✅ क्या केवल दवाओं से गैस हमेशा ठीक हो सकती है?
✅ मन, श्वास और पाचन का संबंध
✅ Vata, Pitta और Gastric Disorders
✅ IBS, Acidity, Constipation और Functional Gastric Disorders की योगिक समझ
✅ भोजन से पहले और बाद की सही मानसिक अवस्था
✅ रोगी के स्वभाव के अनुरूप योग-प्राणायाम एवं श्वास तकनीकें
✅ Gut Healing Meditation एवं Mind Relaxation Method
✅ दैनिक दिनचर्या (Dinacharya) और भोजन के वैज्ञानिक नियम


इस वर्कशॉप में आपको मिलेगा

1-योगी अनूप के दशकों के आत्मानुभवों पर आधारित व्यावहारिक मार्गदर्शन
2-Zoom पर 6+ घंटे का गहन लाइव प्रशिक्षण
3-सभी रिकॉर्डेड सत्रों की आजीवन (Lifetime) एक्सेस
4-Gut & Mind के वैज्ञानिक एवं योगिक सिद्धांतों की गहन समझ
5-रोगानुसार प्राणायाम, योगिक अभ्यास एवं चरणबद्ध Guided Practice


Gastric Disorders Workshop

Content Hours: 6 hour(s)
Fee: 5100/-
Duration : 2 Days
From 2026-09-05 To 2026-09-06

Copyright - by Yogi Anoop Academy